कुकुभ गीत
गीत
होरी..
मया पिरित के रंग डार के,
बने मनाबो होरी ओ।
आज लुका झन घर मा जोही,
रंग लगाले गोरी ओ।।
सुन सतरंगी मोर मयारू,
बाजत ढ़ोल नँगारा ओ।
सब खेलत हें गाँव गली मा,
फगुवा झारा-झारा ओ।।
फाग मया के मिलके गाबो,
झन कर जोरा जोरी ओ..
आज लुका झन घर मा जोही,
रंग लगाले गोरी ओ..ll1
मया रंग बरसाबो संगी,
कुलके मन हा मोरो ओ।
मया पिरित ला जान मयारू,
का सुध नइ हे तोरो ओ।।
मया बढ़ा के नैन मिला के,
करे हवस मन चोरी ओ..
आज लुका झन घर मा जोही,
रंग लगाले गोरी ओ...ll2
देख निकल के घर ले बाहिर,
तोर दुवारी आये हौं।
झन शरमाना ये अलबेली,
मया तोर बर लाये हौं।।
फागुन महिना मन ला भावय,
बाँध मया के डोरी ओ।
आज लुका झन घर मा जोही,
रंग लगाले गोरी ओ..ll3
जे जीयय वो खेलय फगुवा,
मया तहू आ पा ले ओ।
मया उमर भर रइही संगी,
किरिया कसम खवाले ओ।।
हवय बधाई मोर मयारू,
तोला कोरी कोरी ओ...
आज लुका झन घर मा जोही,
रंग लगाले गोरी ओ...ll4
शब्द रचना
डी.पी.लहरे
बायपास रोड कवर्धा
दिनाँक 14-03-19
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