मया के फुलवारी सार छन्द
(फुलवारी)
सार छंद गीत
मोर मया के फुलवारी मा,जोही कब तँय आबे
सपना होगे तोला देखे,अउ कतका तरसाबे।।1
तोर मया बर जिनगी हावय,मोला झन रोवाबे..
मोर मया के फुलवारी मा, जोहीकब तँय आबे..
रहि रहि सुरता आथे जोही,आना मया निभाबे।
मया पिरित हा छुटय कभू झन,एक झलक देखाबे।।2
दुख होगे दुरिहा के भारी,अउ कतका तड़पाबे..
मोर मया के फुलवारी मा,जोहीकब तँय आबे..
हवय अगोरा मोला संगी,मया पिरित बरसाबे।
मँय राजा अँव तँय ओ रानी,मया उमर भर पाबे।।3
देखत रहिथँव आही कहिके,जिवरा कतिक जलाबे..
मोर मया के फुलवारी मा,जोही कब तँय आबे..
कभू छोड़ के मोला संगी,झन तँय हा दुरिहाबे।
तोर बिना रे मँय मर जाहूँ,मोला कभू भुलाबे।।4
मया पिरित के झुलना संगी,आना तहीं झुलाबे..
मोर मया के फुलवारी मा,जोही कब तँय आबे..
सपना होगे तोला देखे,अउ कतका तरसाबे..
मोर मया के फुलवारी मा,जोही कब तँय आबे..
गीत
डी.पी.लहरे
बायपास रोड कवर्धा
दिनाँक 08-01-19
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