फुलकैना सार छन्द गीत श्रृंगार

सार छन्द गीत (फुलकैना)

धक ले जिवरा करथे गोरी,बिनदेखे ओ तोला।
गदगद मन हो जावय जोही,तँय  देखे ओ मोला।1

पइरी बाजे छन छन गोरी,मन ला मोही डारे।
नैना तोरे काजर वाले,करिया बादर हारे।।2

मन बउरागे देख देख के,ठाढ़ जवानी सोला।
धक ले जिवरा करथे गोरी,बिन देखे ओ तोला..

फुलकैना तँय मन मा छागे,मन मा मधुरस घोले।
कोयल जइसन गुरतुर हावय,बोली सुग्घर बोले।।3

कहाँ लुकाये आना जोही, गोजँव बारी कोला..
धक ले जिवरा करथे गोरी,बिन देखे ओ तोला..

बेनी मा ओ सोहे गजरा,फुलवा जइसन हाँसी।
फूल फुले जस आनी बानी,लगथस बारामासी।4

बन जा संगी मोर मयारू,तर जाही ओ चोला।
धक ले जिवरा करथे गोरी,बिन देखे ओ तोला..

बँधे मया के हावय डोरी,नइ छूटय ओ बँधना।
बन जा ओ तँय मोर सुवारी,पहिराहूँ मँय कँगना।5

आवत हँव मँय धरे बराती,ले जाहूँ मँय डोला।
धक ले जिवरा करथे गोरी,बिन देखे ओ तोला..
धक ले जिवरा करथे गोरी,बिन देखे ओ तोला..

गीत
डी.पी.लहरे (व्याख्याता)
बायपास रोड कवर्धा
दिनाँक 07-01-19

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