सार छन्द गीत श्रृंगार (दगा)
सार छन्द गीत श्रृंगार
(दगा)
कभू दगा झन देबे संगी,नइ ते बड़ पछताबे।
मोर सहीं तँय ये दुनिया मा,संगीनइ तो पाबे।।1
दीया बारे खोजत रहिबे,मया कहाँ ले लाबे....
कभू दगा झन देबे संगी,नइ ते बड़ पछताबे....
हँव दीवाना तोर नाँव के,सुन ले ओ दीवानी।
रोग मया के लागे हावय,दे दे मया निशानी।।2
तोर बिना रे मँय मर जाहूँ,कहूँ छोड़ के जाबे....
कभू दगा झन देबे संगी,नइ ते बड़ पछताबे....
तोर नाँव के जपथँव माला,सुन ले मन के मैना।
हिरदे के भीतर मा जोही,तिहीं हवस फुलकैना।।3
हाथ छोड़ के झन तँय जाना,अउ कतका तरसाबे....
कभू दगा झन देबे संगी,नइ ते बड़ पछताबे.....
तिहीं मोर ओ चंदा रानी,मन के मोर तिजौरी।
मँय हा तोरे भोले शंकर,तैंहा हावस गौरी।।4
अब्बड़ मया हवय ओ गोरी,किरिया अपन खवाबे...
कभू दगा झन देबे संगी,नइ ते बड़ पछताबे....
गीत
डी.पी.लहरे
बायपास रोड़ कवर्धा
दिनाँक 31-01-19
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