सपना सरसी छन्द गीत
विरह गीत सरसी छंद
(सपना)....
रहि रहि तोरे सपना आथे,जागत रहिथँव रात।
नैना मा तँय झूलत रहिथस,मन मा करथँव बात।।1
रतिहा सपना तोर जगाथे,कर देथे झकझोर।
जाग जाग मँय हुलसत रहिथँव, सुरता आथे तोर।।2
आवय नइ ये निंदिया बैरी, का निंदिया के जात....
रहि रहि तोरे सपना आथे,जागत रहिथँव रात....
सपना मा तँय आके संगी, हरसाये मन मोर।
आके तँय हा कहाँ भगाथस,बन जाथस चितचोर।।3
अलथ कलथ के रात पहावँव,हवय मिले के आस।
सपना मोरे सच हो जातिस,आते जब तँय पास।।4
मन भर देख देख के तोला, करँव मया बरसात....
रहि रहि तोरे सपना आथे,जागत रहिथँव रात....
नैना मा तँय झूलत रहिथस, मन मा करथँव बात....
रहि रहि तोरे सपना आथे,जागत रहिथँव रात....
गीत डी.पी.लहरे
बायपास रोड़ कवर्धा
दिनाँक 29-01-19
Comments