दाई सार छन्द गीत
सार छन्द गीत..
(दाई)
पाँव परत हँव दाई तोरे,निस दिन गुन ला गावँव।
सात जनम बर बेटा बनके, तोर कोख ले आवँव ।।1
ये दुनिया मा लाये मोला,दाई तोला पावँव।।
पाँव परत हँव दाई तोरे,निस दिन गुन ला गावँव....
तहीं विधाता हावस मोरे, माथा अपन नवावँव।
तोर चरन के धुर्रा दाई, चंदन तिलक लगावँव।।2
दया मया अउ ममता तोरे, सुख छँइयाँ मँय पावँव।
पाँव परत हँव दाई तोरे,निस दिन गुन ला गाववँ.....
सरग बरोबर तोर हाँथ हे,मोला तँय सिरजाये।
अँगरी धरके तँय हा दाई,ठुमुक ठुमक रेंगाये।।3
महिमा अब्बड़ भारी हावय,काया फूल चढ़ावँव।
पाँव परत हँव दाई तोरे,निस दिन गुन ला गावँव.....
दया मया ममता सागर हे,महतारी के कोरा।
कृपा मोर बर करके दाई,करथस जोंखा तोरा।।4
तोर कोख मा आके दाई,मँय हा खुशी मनावँव।
पाँव परत हँव दाई तोरे,निस दिन गुन ला गावँव.....
तहीं मोर ओ चाँदी सोना,धन दौलत अउ हीरा।
मोरे कारन तोला दाई,सहे परय *झन* पीरा।।5
बेटा फरज निभाके दाई,सेवा तोर बजावँव।
पाँव परत हँव दाई तोरे,निस दिन गुन ला गावँव..
गीत
डी.पी.लहरे
बायपास रोड़ कवर्धा
दिनाँक 21-01-19
Comments