अंतस के पीरा सार छंद गीत
सार छंद
वियोग श्रृंगार
अंतस के पीरा ला गोरी,देखे बर तँय आजा।
तँय मोरे ओ मन के रानी,अउ मँय तोरे राजा।।1
मन भीतर मा बाजत हावय,गुदुम गुदुम ओ बाजा..
तँय मोरे ओ मन के रानी,अउ मँय तोरे राजा..
सपना आके अबड़ सताथे,तरसत हावय चोला।
बोहत रहिथे आँसू झर झर ,सुरता करके तोला।।2
मन मंदिर मा तहीं बिराजे,आके झलक दिखाजा..
तँय मोरे ओ मन के रानी,अउ मँय तोरे राजा..
तन मन मा ओ तहीं समाये,अनपानी नइ भावय।
घेरी बेरी आथे सुरता,छिन भर नइ तो जावय।।3
भरे जवानी हा तड़पत हे,पीरा हावय ताजा..
तँय मोरे ओ मन के रानी,अउ मँय तोरे राजा..
मोर दरद ला काला काहँव,सुन लेओ फुलकैना।
तहीं समझ पाबे ओ गोरी,मया पिरित के बैना।।4
जनम जनम बर तोला पावँव,तँय मोला ओ पाजा..
तँय मोरे ओ मन के रानी,अउ मँय तोरे राजा..
आठो पहरी गावत रहिथौं,हमर मया के गाना।
तोर मया बर कलपय जिवरा,झन मोला तरसाना।।5
बन के तहीं सुवारी संगी,मोर दुवारी आजा..
तँय मोरे ओ मन के रानी,अउ मँय तोरे राजा..
गीत
डी.पी.लहरे
बायपास रोड़ कवर्धा
दिनाँक 16-0-19
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