कुआँ पार सार छंद गीत

सार छन्द गीत श्रृंगार
                 कुआँ पार

कुआँ पार मा बइठे हावँव,सुरता तोर लमाये।
रस्ता तोरे जोहत हावँव,तँय कइसे नइ आये।।1ll

धर के गगरी आजा गोरी,जोही तोर बलाये...
कुआँ पार मा बइठे हावँव,सुरता तोर लमाये....

छुनुर छुनुर बड़ पैरी बाजे,बोली गुरतुर बोले।।
मुड़ मा गगरी बोहे गोरी,कनिहा लिच लिच डोले।।2ll

वो दिन के ओ सुरता आथे,नैना रोज लड़ाये....
कुआँ पार मा बइठे हावँव,सुरता तोर लमाये....

बने बहाना करके आबे,भर ले जाबे पानी।
देखे बर ओ नैना तरसे,सुन ले मोरे रानी।।3ll

एक झलक देखँव ओ तोला,तरसत हँव बिन पाये...
कुआँ पार मा बइठे हावँव,सुरता तोर लमाये....

झन तरसाना आजा गोरी,बाँध मया के बँधना।
दे देहूँ मँय चिनहा जोही,खिनवा चूरी कँगना।।4ll

आबे आबे मोर मयारू,काबर ओ तरसाये....
कुआँ पार मा बइठे हावँव,सुरता तोर लमाये....

गीत
डी.पी.लहरे
बायपास रोड़ कवर्धा 
दिनाँक 16-01-19

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