सुवा गीत
सुवा गीत..
तरी हरी नाहना मोर
नाहानारी नाहानारे सुवा हो के,
धनी ख़ातिर करे हँव सिंगार..
ना रे सुवा हो के,
धनी मोर जीव के अधार..
पंइया परत हँव मँय,
गुन ला तोर गाँव, नारे सुवा हो के
धनी बिना जिये नइ पाँव..
तरी हरी नाहना मोर
नाहानारी नाहानारे सुवा हो के,
धनी खातिर भले मर जाँव..
देवता बना के अपन,
मन मा बसायेंव,ना रे सुवा हो के
धनी बिना जग अँधियार,
तरी हरी नाहना मोर
नाहानारी नाहना रे सुवा हो के
धनी खातिर करे हँव सिंगार,
धनी के गुरतुर बोली
जिवरा ला लुभाय ना रे सुवा हो के
धनी मोर आवय संसार,
ना रे सुवा हो के
धनी खातिर करे हँव सिंगार
धनी खातिर करे हँव सिंगार ।।
रचना डी.पी.लहरे
भोरमदेव साहित्यिक सृजन मंच
कबीरधाम छत्तीसगढ़
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