धार छंद श्रृंगार
नैना चार,
करले प्यार।
सोच विचार,
हो तैयार।।
मेरी जान,
तू ईमान।
मेरी शान,
मैं नादान।।
तू है खास,
आजा पास।
ये है आश,
बूझा प्यास।।
दिल में छाय,
मुझको भाय।
मन हरसाय,
क्यों तरसाय।।
दिल में तीर,
होती पीर।
नैना नीर,
बहे शरीर।।
तू भरपूर,
ना जा दूर।
दिल को चूर।
करके पूर।।
तेरी बात,
हर दिन रात।
फेरे मात,
ले लूँ सात।।
मेरी आन,
तू ही बान।
अब पहचान,
कर अहसान।।
शब्द रचना
डी.पी.लहरे बायपास रोड कवर्धा
दिनाँक 19-12-18
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