सरसी छन्द

सरसी छन्द

मात्रा 16,11

बही लजाये देखय मोला,हाँसय कुलकय आज।
आनी बानी गहना गोंटी,करे हवय जी साज।।1

आँखी मा कजरा हे गोरी,होंठ हवय ओ लाल।
चूँदी करिया बादर तोरे, गजरा दिखे कमाल।।2

कनिहा करधन गर मा रुपिया,चूरी ला खनकाय।
चाँदी के गहना मा जोही,तन ला अपन सजाय ।।3

मुच मुच ले मुसकाये गोरी,मन ला मोहे हाय।
आठो पहरी देखँव तोला,दिल ला मोरो भाय।।4

धीरे धीरे अउ बाढ़न दे,हमरो मया अपार।
जीबो मरबो दूनो संगी,जरय भले संसार।।5

रचनाकार
डी.पी.लहरे
कबीरधाम
छत्तीसगढ़

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