मया
तोर मया ला छाती मा,
बही मँय लगाये हँव।
भूला के देखेंव तोला,
फेर भूल नइ पाये हँव।।
तोर खुशबू ला रे जोही,
मोर सांसा मा बसाये हँव।
दिल मा तोर सुरता हे,
आँखी मा तोला अँजाये हँव।।
तोला देख के संगवारी,
मँय दुनिया ला भुलाये हँव।
मोर आँखी के पुतरी मा,
तोला मँय लुकाये हँव।।
तोर मया के दीया संगी,
मन मा मँय जलाये हँव।
सिरतोन तोर मया ला,
जनम जनम बर पाये हँव।।
मया के दशहरा देवारी,
रोज मँय मनाये हँव।
तहीं मोर ईद के चँदा,
मन मा तोला सजाये हँव।।
रचनाकार
डी.पी.लहरे
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