श्रृंगार रस
कविता
दिल को मेरे भा गया,
तेरी मतवाली चाल।
हँसिन चेहरा हमऩशी,
काली घटा सी बाल।।
काजल वाली नैनों से,
दिल पूंछे एक सवाल।
है कितना प्यार इसमें,
है कुदरत का कमाल।।
डोले कान की कुंडल,
तिल भी है गोरी गाल।
होंठ रसीली है जलेबी,
माथे पे बिन्दी है लाल।।
दाँत नहीं है मोती है,
गले गुलाब की डाल।
चमके ये गुलाबी वसन,
फँसाये इंद्र की जाल।।
काली नागिन सी भौंह,
दिल को ना डस डाल।
अब तो देख लो प्रिये!
सच क्या है मेरा हाल।।
शब्द रचना-
डी.पी.लहरे
दिनाँक 24.08.18
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