मुक्तक
मुक्तक
रचना डी. पी .लहरे
सब ले मया कर लव संगी,
चार दिन के जिनगानी हे।
दया मया जी मन मा राखव,
लहुटे कहाँ जवानी हे।।
सुख दुःख के हे आना जाना,
आँखी मा मया पीरा के पानी हे।
जग मा सत के काम करव जी,
सत ले सबो कहानी हे।।
नाँव अमर हो जाही जग मा,
येही दुनिया के निशानी हे...
दया मया जी मन मा राखव
चार दिन के जिनगानी हे...
माटी के पुतरी ये काया,
येखर माया आनी बानी हे।
मानुष जनम ला जेन पाये हे,
भाई ओही भागमानी हे।।
दया धरम भाई जे नइ जाने,
ओखर बड़ नादानी हे...
दया मया जी मन मा राखव,
लहुटे कहाँ जवानी हे..
Comments