सार छन्द

सार छन्द

माटी के काया हे संगी,माटी मा मिल जाही।
राजा होवय चाहे परजा,काल सबो बर आही।।

आना जाना लगे हवय जी,जाना हवय अकेला।
काया माया चारे दिन के,ये दुनिया के मेला।।

जइसन करबे तइसन पाबे,सरग नरख दरवाजा।
जाना परही तोला संगी, ले जाही यम राजा ।।

जीना मरना होथे जग मा,एही हवय कहानी।
सत करम करव मोर भईया,जग मा रहय निशानी।।

रचना डी पी लहरे
बायपास रोड़ कवर्धा

Comments

Popular posts from this blog

लक्ष्मण मस्तुरिहा

छत्तीसगढ़ महतारी

मरिया भात..