एक बात पूछत हँव..

एक बात पूछत हँव..

एक बात पूछत हँव तोला
तँय बताबे मोला का ओ।
कब ले तँय तरसाबे मोला
तँय बिहाबे मोला का ओ।।

उदास रहिथँव तोर बिना
तँय हँसाबे मोला का ओ।
भरोसा का हे जिनगी के
अपन बनाबे मोला का ओ।।

बेरा कुबेरा तोर सुरता हे
बइहा बनाबे मोला का ओ।
मोर नजरे नजर मा झुलथस
चेहरा देखाबे मोला का ओ।

छिन भर नइ छोडँव तोला
दिल मा बसाबे मोला का ओ।
मया रही जियत भर संगी
किरिया खवाबे मोला का ओ।।

नइ होवँव मँय तोर ले अलग
मया मा सजाबे मोला का ओ।
संगी संग देहूँ सातो जनम तोर
काजर अस अँजाबे मोला का ओ।

शब्द रचना डी.पी.लहरे
बाय पास रोड कवर्धा
सर्वाधिकार सुरक्षित है
Dplahre87@gmail.com

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