दिलजला.. (कविता)
तेरी गर्म साँसों में दिलबर,
दिल मेरा पिघल गया।
ना बुझी दिल की आग,
आह!दिल मेरा जल गया।।
भोली सुरत नैन नशीली,
दिल मेरा मचल गया।
दिल से दिल की बातें जानू,
मेरे जुबां से निकल गया।।
गम नहीं है अब मुझको,
दिले नादान संभल गया।
यार मेरे प्यार है बरकरार,
यार मौसम सा बदल गया।।
भूला कर ओ खामोश है
और अपने में ही ढ़ल गया।
छलिया है ओ छलिया है,
मोहब्बत को मेरे छल गया।।
रचनाकार-डी पी लहरे
बायपास रोड कवर्धा
सर्वाधिकार सुरक्षित है
Dplahre87@gmail.com
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