नानपन के संगवारी

नानपन के तँय संगवारी
तँय राधा मँय तोर बनवारी।।
तँय तो अब भूला गे मोला..
नइ आवय का सुरता तोला..

तोर सुरता अब्बड़ सताथे
लटपट मा दिन हा पहाथे।।
मिले बर तरसत रथे चोला..
तँय तो अब भूला गे मोला..

गली गली मा घुमत रहेन
रंग रंग के संग खेलत रहेन।।
तँय पारबती अउ मँय भोला..
तँय तो अब भूला गे मोला..

तँय कतका मया करत रहे
मोर से मिले बर मरत रहे।।
तोर उमर रहिस ता सोला..
तँय तो अब भूला गे मोला..

संगे संग माटी धुर्रा उड़ावन
चिखला पानी मा सनावन।।
इस्कूल धर के जावन झोला..
तँय तो अब भूला गे मोला..

चना मुर्रा लाई लेवन खावन
किराया के साइकिल चलावन।।
चोंहकन बरफ चुस्की गोला..
तँय तो अब भूला गे मोला..

अमरईया मा झूलना झूलन
आँखी मूंद के टिप खेलन।।
अउ तँय छूवच जोही मोला..
तँय तो अब भूला गे मोला..

शब्द रचना
डी.पी.लहरे
सर्वाधिकार सुरक्षित है
dplahre87@gmail.com

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