याद पिया की..

देखो ये बदरा छाने लगे..
पानी अब बरसाने लगे..

शीतल शीतल पुरवाई ने..
मन को आज हर्षाने लगे..

रिमझिम रिमझिम बूंदों ने..
धरा को अब महकाने लगे..

अब हरा भरा हुआ धरा ने..
हरियाली का रंग चढ़ाने लगे..

मस्त होकर मतवाली सी..
खुद को आज सजाने लगे..

पानी की बूंदों ने छम छम..
अमर प्रेम राग सुनाने लगे..

बलखाती बेले,कलियों ने..
देखकर वर्षा मुस्कुराने लगे..

साजन बिन सजनी बेचैन..
याद पिया की आने लगे..

शब्द रचना- डी पी लहरे
सर्वाधिकार सुरक्षित है
Dplahre86@gmail.com

Comments

Unknown said…
Bhot hi sundar rachna sir jii
DP LAHRE"MAUJ" said…
हृदय से हार्दिक आभार साथी

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