अमर प्रेम...

अमर प्रेम...

मेंहदी प्यार का हाथों में रचा लेना।
इश्क है तुमसे हमें अपना बना लेना।।

मेरी खुशियों की जहाँ में तुम हो।
गजरा प्रेम का बालों में सजा लेना।

मेरी धड़कन मेरी साँसें तुम हो।
दिलबर मुझे आँखों में बसा लेना।।

तुम्हारे सजने से दिल संवरता है।
गोरी,आँखों में काजल लगा लेना।।

चला भी आ कि अंधेरा है दिल मेरा।
प्रेम का दीप मेरे दिल में जला देना।।

दुनिया में है बस एक तु ही हसीन।
दिल~ए~गुलशन में फूल खिला देना।।

जुदा न होंगे उमर भर हमदम मेरे।
अमर हो जाऊँ मैं प्रेम रस पिला देना।।

शब्द रचना- डी पी लहरे
सर्वाधिकार सुरक्षित है
Dplahre87gmail.com

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