तेरा शबाब..
**ग़ज़ल**
तेरा शबाब...
मिलने को तुमसे दिल बेताब है।
इन आँखों में तेरा ही तो ख़ाब है।।
यूँ दूर जाके हमें भुल जाना नहीं।
दिलबर मेरे दिल की तु महताब है।।
तेरी याद में बावला सा हो गया।
तु मेरे दिल की खिलता गुलाब है।।
न सताओ इस कदर जाने मन।
जानू तुमसे मोहब्बत बेहिसाब है।।
फिर मिलो तुम मुझसे हमऩशी।
रब दिया कायनात,तेरा शबाब है।।
शब्द रचना- डी पी लहरे
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Dplahre87@gmail.com
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