मिली न नसीब में...
मिली न नसीब में वो कहानी लिखता हूँ।
मेरी हसरत की मैं वो जवानी लिखता हूँ।।
मुस्कुरा के दिए थे एक दिन गुलाब।
कविता में वो प्यार की निशानी लिखता हूँ।।
डरता है दिल जुदाई से तड़पता है।
जुदाई में मेरी इन आँखों से पानी लिखता हूँ।।
नहीं कटता दिन रैन तेरे बिन सजनी।
तुम्हारी आस में धड़कन दिवानी लिखता हूँ।।
अब तुम्हारी ही यादों में मस्त रहता हूँ।
सनम तुम्ही से मेरे रगो में रवानी लिखता हूँ।।
शब्द रचना-डी. पी. लहरे
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Dplahre86@gmail.com
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