भुला दोगे यार मुझे..
विधा-ग़ज़ल
शीर्षक-भुला दोगे यार मुझे..
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लगता है भुला दोगे यार मुझे,
शायद नहीं करते प्यार मुझे।।
दिल की बातें जो कही आप से,
ऐसे ही क्यूँ माने ख़तावार मुझे।।
दुनिया की कोई फिकर नहीं है,
पर तुम न समझो गुनहगार मुझे।।
फुर्सत के पल में मिलते भी नहीं,
अब इतना न करो बेकरार मुझे।।
वफा कर न बेवफा बन जालिम,
कर दिए मोहब्बत में शुमार मुझे।।
दिल ही क्या जान भी हाज़िर है,
लोग कहते"लहरे"दिलदार मुझे।।
मैं जानता हूँ हश्र मोहब्बत का,
जमाना चाहे समझे बेकार मुझे।।
दिल की चमन में खिले फूल हो,
मेरी हसरतों का दे दो बहार मुझे।।
दिल सुनता है मीठी आवाज तेरी,
जरा दिल से "डी.पी पुकार मुझे।।
रचना-डी.पी.लहरे
सर्वाधिकार सुरक्षित है
Dplahre87@gmail.com
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