भीग जाए हिन्दुस्तान..
सावन में गदरा गए,
फिर से खेत खलिहान।
मगन होके नाचने लगे,
फिर से अब किसान।।
बूँद बूँद गिरे धरा पर,
ये धरती का वरदान।
मन सबका हर्षित हुआ,
बच्चा,बुढ़ा,जवान।।
पल में बादल घिर गए,
लता में आई जान।
हरियाली रचने लगे,
ये धरा की है शान।।
नदिया बहती गर्व से,
नहीं कोई अभिमान
पावस में मेघा बरसे,
ये बादल है महान।।
छम छम बूँदें नाचती,
बादल सुनाते गान।
जमके बरसो रे मेघा,
भीग जाए हिन्दुस्तान।।
शब्द रचना-डी.पी.लहरे
सर्वाधिकार सुरक्षित है
Dplahre87@gmail.com
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