साहिबा..

साहिबा...

चेहरे से जुल्फ़ को हटाइये साहिबा..
इधर देख जरा मुस्कुराइये साहिबा..

हँसीं समां है दिल न दुखाइये साहिबा..
मुझसे दूर नहीं पास तो आइये साहिबा..

गैर नहीं हूँ मैं यूँ न दूर जाइये साहिबा..
चाँद सा चेहरा यूँ न छूपाइये साहिबा..

हम तुम्हारे हैं यूँ न शरमाइये साहिबा..
जलवा हूस्न का अब दिखाइये साहिबा..

अपना हाल कुछ फ़रमाइये साहिबा..
बेताब है दिल गले तो लगाइये साहिबा..

मेरे हाथों से हाथ न हटाइये साहिबा..
प्यार को थोड़ा और बढ़ाइये साहिबा..

मेरे रग रग में समा जाइये साहिबा..
हूँ मैं प्यासा हाँ प्यास बुझाइये साहिबा..

शब्द रचना डी.पी.लहरे
सर्वाधिकार सुरक्षित है
Dplahre86@gmail.com

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