वर्षा रानी...


उमड़ घुमड़ आए बदरा...
           जैसे गोरी करती नखरा...
रिमझिम बरसे पानी..
             मस्त लगे जिन्दगानी..
बिजुरिया चमके चम चम...
          जैसे गोरी नाचे छम छम...
बेला,कली ये पत्ते...
              झुमते हँसते हँसते...
झिंगुरा राग सुनाए...
               दादूर भी टर्राए...
नदी,नालों में बहती धार...
                हर्षाती बरखा बहार...
धरती में हरियाली छाई...
            बड़े दिनों में वर्षा आई...
अन्नदाता अब करे किसानी...
         आ बरसो अब वर्षा रानी...

स्वरचित- डी.पी.लहरे
बायपास रोड़ कवर्धा
सर्वाधिकार सुरक्षित है
Dplahre86@gmail.com

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