कविता~काजल

कविता..काजल..

तुम्हारे आँखों के काजल में,
दिल को बहलाए हैं।
अपने दिल के बादल में,
एक चाँद को छुपाए हैं ।।

सर से पाँव तक कयामत हो,
तुम्हारे आगे चाँद भी शर्माए हैं।
तुम्हारे ये मदहोश नज़र,
मृग नयनी कहलाए हैं। ।

नाज़ुक लब,खुले जुल्फ ने,
दिल मेरा धड़काए हैं।
देखकर तुम्हारे कातिल अदा,
जहाँ सारा ललचाए हैं। ।

गोरे गाल, और लाल लिबाज
देखकर ,फूल भी मुरझाए हैं।
चंचल मन,तन उज्जवल,
खुदा ने इत्मीनान से बनाए हैं। ।

गले में चैन, रेशम की माला,
माथे पे बिंदी लगाए हैं।
कोमल सी दो कली गुलाब की,
मंद मंद मुस्कराए हैं। ।

दंत धवल,चाँदी सी चमकते ,
सूरज भी घबराए हैं।
उड़े जुल्फ तो बरसे बदरा ,
मेरे तन मन को हरसाए हैं ।।

शब्द-रचना डी पी लहरे
सर्वाधिकार सुरक्षित है
Dplahre87@gmail.com

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