दिल के नग़मे..

विधा-गज़ल
शीर्षक-दिल के नग़मे..
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दिल के नग़मे मैं सुनाने जा रहा हूँ।
तेरी ही गीत मैं गुन गुनाने जा रहा हूँ।।

तुम ही हो खयालों में मेरे अब भी।
ख़ाब मोहब्बत का सजाने जा रहा हूँ।।

बरसों से तेरी यादों में तन्हा रहा।
मैं तार दिल का बजाने जा रहा हूँ।।

सुनों हसीन दिलरूबा मैं हूँ बेकरार।
मजबूरीयों को मैं मिटाने जा रहा हूँ।।

धक से धड़कता है दिल तेरी याद में।
मैं प्रेम का चिराग जलाने जा रहा हूँ। ।
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शब्द रचना-डी पी लहरे
कवर्धा मोबा-7898690867
सर्वाधिकार सुरक्षित है
Dplahre87@gmail.com

Comments

sudhir said…
दिल की नग़मे सुना दी तुमने
मोहब्बत की ग़ज़लें गुनगुना दी तुमनें
बस एक गुजारिश है तुमसे ऐ ख़ुदा
न करना कभी हमकों उनसे जुदा ।।

DP LAHRE"MAUJ" said…
लाजवाब भाई बेहतरीन लिखे हो।।

बहुत-बहुत धन्यवाद

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