दिल की कश्ती ..
दिल की कश्ती मजधार में उतारी।
प्रेम की देवी तुम और मैं पुजारी।।
समझो जी तुम मोहब्बत हमारी।
क्या होती है दिल की बेकरारी।।
तेरी ही चाह में जिन्दगी गुजारी।
जी नहीं सकता बिन तेरी यारी।।
दिल के अरमाँ में वफ़ाएँ तुम्हारी।
समझ न आये जाँन तेरी खुद्दारी।।
दिलकश हसिन हो सच कहूँ प्यारी।
जिन्दगी तुमसे,तुम ही दुनिया सारी।।
शब्दरचना- डी पी लहरे
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Dplahre87@gmail.com
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