सच और झूँठ


साँच को आँच नहीं प्यारे...
फिर क्यों हिम्मत हारें...

चलती है दुनियाँ
सच के सहारे...
झूँठ से न कोई
जिन्दगी गुजारें...

साँच को आँच नहीं प्यारे...
फिर क्यों हिम्मत हारें ...

जीत होती है
सच के सहारे...
झूँठे को कभी 
मिलती नहीं किनारे...

साँच को आँच नहीं प्यारे...
फिर क्यों हिम्मत हारें...

सच बोलने वाले
होते हैं न्यारे..
झूँठ से क्या फायदा
ये मन में विचारें..

साँच को आँच नहीं प्यारे...
फिर क्यों हिम्मत हारें...

झूँठ को आज से
अभी से बिसारें...
सच में  ही सदा
दिल,जाँ भी निसारे..

साँच को आँच नहीं प्यारे...
फिर क्यों हिम्मत हारें...

मन से तन से
बस सच को पुकारें...
फिर जिन्दगी में
सदा रहेगी बहारें...

साँच को आँच नहीं प्यारे...
फिर क्यों हिम्मत हारें...

शब्द रचना- डी पी लहरे
सर्वाधिकार सुरक्षित है
Dplahre87@gmail.com

Comments

बहुत बढ़िया रचना।।
बहुत बढ़िया रचना।।
DP LAHRE"MAUJ" said…
बहुत-बहुत धन्यवाद आदरणीय सर
DP LAHRE"MAUJ" said…
बहुत-बहुत धन्यवाद सर

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