सच्ची नारी लगे..

अधर मधुर मधुर,
नयन कटारी लगे।।
बदन गुलाब की पंखुड़ियाँ,
लटें नागिन कारी लगे।।
मधुवन सा यौवन खिला खिला,
तु अल्हड़ मतवारी लगे।।
चमके दाँत,महकते साँस,
तु सच में राजकुमारी लगे।।
चाँद सी चमकती बिंदीया,
नाक फूलों की क्यारी लगे।।
तेरे हँसने से झरते जुगनु,
तु प्रेम अमृत की धारी लगे।।
मखमली मुलायम बदन,
तु मक्खन सी प्यारी लगे।।
तन महकते मन महकते,
कसम से तु फुलवारी लगे।।
जुबाँ मधुरस,भौंह भ्रमर,
तु सच में सच्ची नारी लगे।।
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शब्द संयोजन-डी पी लहरे
सर्वाधिकार सुरक्षित है
Dplahre87@gmail.com

Comments

DP LAHRE"MAUJ" said…
बहुत-बहुत धन्यवाद आप सभी का

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