मन के डोरी~~~


कंगना,चुरी,खिनवा,पइरी,
टोंड़ा मँय पहिरा लेतेंव।
टूटय झन बिसवास के डोरी,
तोर मया म तन उजरा लेतेंव।।

बना के अपन सुवारी तोला,
तोर संग भाँवर परा लेतेंव।
तोर मया ल पा के मयारू,
मोर दुख पीरा बिसरा लेतेंव।।

लाली के लुगरा लाली के पोलखा,
सेंदुर तोर माथ म लगा लेतेंव,
बन जाते मोर हिरदे के रानी।
मँय तोर संग जिनगी बसा लेतेंव।।

मया पिरीत के बंधना म जोही,
तोर संग मया बँधा लेतेंव।
जीयत मरत के संग देवईया,
तोला चीर के करेजा देखा लेतेंव।।

आठो अंग म सोला सिंगार,
सोन पुतरी कस तोला सजा लेतेंव।
अमर हो जातीस हमर मया हर,
मँय तोर संग जिनगी पहा लेतेंव।।

शब्द रचना डी पी लहरे
सर्वाधिकार सुरक्षित है
Dplahre87@gmail.com

Comments

बहुत सुघ्घर श्रृंगारिक रचना, बहुत बहुत बधाई।।
बहुत सुघ्घर श्रृंगारिक रचना, बहुत बहुत बधाई।।
DP LAHRE"MAUJ" said…
बहुत बहुत धन्यवाद आदरणीय सर

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