मुचमुच ले हँसी
*मुचमुच ले हँस के*
चँदा अस चेहरा ल सजाये काबर ओ
आँखी म काजर अंजाये काबर ओ
जोही निरमोही तँय भुलाये काबर ओ
चँदा अस चेहरा ल सजाये काबर ओ
चाँदी अस चमकत हे तोर उज्जर दाँत
का मोहनी खवाये बाँधे मया के फाँस
मोला मया के रंग म रंगाये काबर ओ
चँदा अस चेहरा ल सजाये काबर ओ
माथ म बिंदी अंगरी म हवे मुंदरी
तोर सहीं जग म कोनो नइ हे सुंदरी
देख के गोरी तँय मुस्काये काबर ओ
चँदा अस चेहरा ल सजाये काबर ओ
माँघ म सेंदूर हे करिया घटा चुंदी
जोगनी आँखी तोर खेले घनी मुंदी
मीठ-मीठ बोली म फँसाये काबर ओ
चँदा अस चेहरा ल सजाये काबर ओ
गोरी गुलाबी होंठ तोर गुरतुर हे बानी
कान म टाप पहिरे मारे ओ छयलानी
मुचमुच ले हँस के रिझाये काबर ओ
चँदा अस चेहरा ल सजाये काबर ओ
नख म नखपालीस गाल ओ गुलाबी
मन बैरी मात गेहे बन गेहे शराबी
गोरी काया ल तँय लुकाये काबर ओ
चँदा अस चेहरा ल सजाये काबर ओ
लिखईया-डी पी लहरे
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Dplahre86@gmail.com
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