गज़ल
ग़ज़ल
दिल~ए~नदां तुझे समझाऊँ कैसे
ओ रूठी रूठी रहती है मनाऊँ कैसे।।
ओ खैरियत रहे मेरी यही दुआ है
ख़ुशी और ग़म को मैं छुपाऊँ कैसे।।
जिन्दगी का अजब खेल है गमनुमा
ग़मज़दा जिन्दगी बिताऊँ कैसे।।
खाते हैं हर मोड़ पर बस ठोकर
दर्द जिगर का मैं दिखाऊँ कैसे।।
दिल से चाह जिगर तक उतर गई
अब उनकी यादों को मिटाऊँ कैसे।।
उनकी यादों में जिन्दगी गुजर गई
गम~ए~दिल को हँसाऊँ कैसे।।
शुक्रिया मेरे दिल में यूँ बसने वाले
बिन देखे दिल की प्यास बुझाऊँ कैसे।।
तुम बिन अंधेरा था अब यूँ है उजाले
दिल में चिराग मैं जलाऊँ कैसे।।
एक तेरा ही चेहरा पल पल याद आया
सूखनेे लगे हैं अश्क मैं बहाऊँ कैसे।।
दिल~ए~जिगर में फरियाद आया
फरियाद से ही इश्क निभाऊँ कैसे।।
मगफ़त करे ओ मेरी है आरज़ू
बग़ैर उसके मैं सुरत सजाऊँ कैसे।।
नदां=नादान
खैरियत=कुशल,मंगल
गमजदा=अधिक दुःख
अश्क=आँसु
फरियाद =दुहाई
मगफत=खुदा माफ करे
शब्द रचना-डी पी लहरे
सर्वाधिकार सुरक्षित
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