जिन्दगी
खुशियों से सजी तो कहीं ,
ग़मो से गुलजार है जिंदगी...!!
कहीं आँसुओ की जीत ,
तो कहीं हँसी की फुहार है जिंदगी....!!
कहीं सूखे पतझड़
तो कहीं बहार है जिन्दगी ...!!
कहीं वीरानी तो कहीं महफिल में भी
बेजार है जिन्दगी...!!
कहीं भागम-भाग तो कहीं
सुख का बाजार है जिन्दगी...!!
कहीं दो रोटी की जुगाड़ तो कहीं
पैसों की भरमार है जिन्दगी ...!!
कहीं निर्अपराध अपराधी तो कहीं
दागदार है जिन्दगी ...!!
कहीं पुण्य,पतित पावन तो कहीं
गुनहगार है जिन्दगी ...!!
कहीं दुखों का कहर तो कहीं
खुशी का त्यौहार है जिन्दगी...!!
कहीं पीड़ा की आह तो कहीं
मौजों की बौछार है जिन्दगी...!!
कहीं वियोग, बिछुड़न तो कहीं
संगम का संसार है जिन्दगी ...!!
शब्द रचना डी पी लहरे
सर्वाधिकार सुरक्षित है
Dplahre86@gmail.com
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