गीत

मया के गोठ

कभू मोर तीर म आते
कभू दुरिहा झन जाते
कभू मोर तीर म आते
कभू दुरिहा झन जाते !!

कभू तो दरश देखाते ओ..
मया के गोठ गोठियाते ओ..

मन म बसायेंव तोला
दिल म सजायेंव तोला
मन म बसायेंव तोला
दिल म सजायेंव तोला !!

कभू तो मोला तँय हँसाते ओ...
मया के गोठ गोठियाते ओ...

रहिथंव मँय तोरे धुन म
अऊँटत हे मोरे खुन ह
रहिथंव मँय तोरे धुन म
अऊँटत हे मोरे खुन ह !!

कभू मोला तीर म बलाते ओ...
मया के गोठ गोठियाते ओ...

मया म झन कर जुलूम
बिन तोर ये जिंनगी कुलूप
मया म झन कर जुलूम
बिन तोर ये जिंनगी कुलूप !!

कभू मया दीया के जलाते ओ...
मया के गोठ गोठियाते ओ...

कभू मोर घर म आते
कभू मया बरसाते
कभू मोर घर म आते
कभू मया बरसाते !!

कभू मोर मन ल हरसाते ओ...
मया के गोठ गोठियाते ओ...

शब्द- रचना डी पी लहरे
सर्वाधिकार सुरक्षित है
Dplahre86@gmail.com

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