गज़ल
मोहब्बत का चिराग दिल में जल रहा है
रौशन है दिल,दिन खुशी से ढ़ल रहा है।
तन्हा नहीं रातों में अब हम तुम!
मोहब्बत का रिश्ता दोनों में पल रहा है।
न तड़प न तन्हाई नहीं है जुदाई!
यूँ वफा का सिलसिला चल रहा है।
मैं हूँ तेरा राज़ और तू मेरे हमराज़!
वफा ए इश्क़ का दरिया निकल रहा है।
दामन जुड़े हैं मेरे तुम्हारे उम्र भर!
देख कर तुझे अरमाँ मचल रहा है।
शोख़ नज़र से ही हुई मुराद पुरी!
हुस्न अदायगी में शबनम पिघल रहा है
रब करे ऐसी मोहब्बत मिले सभी को!
जान देखिये अब जमाना बदल रहा है।
शब्द रचना डी पी लहरे
सर्वाधिकार सुरक्षित है
Dplahre86@gmail.com
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