जन्नत

जन्नत

तेरी सूरत में सदा मुस्कुराहट देखा
अंधेरे दिल में अब जगमगाहट देखा।

तुमको भी देखा, तेरा शहर भी देखा
नज़ारे इश्क़ का, तेरा कहर भी देखा।

ख्वाब तेरा और तेरी चाहत भी देखा
यादों में गम और तेरी आहट भी देखा।

आँखों की जन्नत,रूखशार भी देखा
इस कदर खुबसूरती का बहार भी देखा।

बेकसी का आलम,नज़ाकत भी देखा
साँसों के तारों में तेरा इबादत भी देखा।।

तुम ही मन्नत,तुझमें संसार भी देखा
महकते फूलों का,तुझमें प्यार भी देखा।

दिल के कोने में तेरा ही बसावट देखा
अप्सरा हो हँसिन तुझमें सजावट देखा।

नज़ाकत=कोमलता
बेकसी=विवशता
रूख़सार=गाल
कहर=गुस्सा

शब्द रचना डी पी लहरे
सर्वाधिकार सुरक्षित है
Dplahre86@gmail.com

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