आश
जाने से पहले एक बार देखा होता
दिल में कितना है प्यार देखा होता
आश थी मिलन की न पास बुलाये
चले गये दूर हमसे न प्यास बुझाये
दिल की दरकार को कब समझोगे
दिल~ए~बीमार को कब समझोगे
जाँ रहते हो दूर तो पास बुलाते हो
जरा पास आने से प्यार जताते हो
क्या है दिल में अब कह दो तुम्हारे
हम भी समझते हैं दिल के इशारे
अपना बना के तुम यूँ न दूर जाना
चुभन सा लगता है ये तेरा इतराना
दिल समझता है तुझे चाँद सितारा
समझ तो सहीं ओ इश्क की धारा
मन से मेरे तुम कभी न होना जुदा
दिल ने मेरे माना है तुम्हे यार ख़ुदा
दिल दिया है अब जो भी हो सो हो
हुस्न का दीदार कर जो होना होने दो
शब्द रचना डी पी लहरे
Dplahre86@gmail.com
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