भुला जाही का...
भुला जाही का...
भुला जाही का रे
भुला जाही का रे
भुला जाही का....
जोरे पिरितिया ल
मोरे सुरतिया ल
भुला जाही क....
पहली अपन मन के
बात ल बतावय
गुरतुर बोली मया के
मोला वो सुनावय
भुला जाही का रे
भुला जाही का रे
ये भुला जाही का....
मोरे सुरतिया ल
मया के किरिया ल
भुला जाही का....
हँस हँस मोला अपन
तीर म बलावय
रंग रंग खाई खजेना
मोला वो खवावय
भूला जाही का रे
भूला जाही का रे
ये भुला जाही का....
मया के कुरिया ल
खेले घर घुंदिया ल
भुला जाही का...
पहिली बने अपन
संग म घुमावय
दुरिहा ल देख के
मुच ले मुसकावय
भुला जाही कारे
भुला जाही कारे
भुला जाही का....
संगी जहूंरिया ल
घर मोर दुवरिया ल
भुला जाही का
पहली बोलय अपन
तीर तीर म नचावय
कहूँ जावय त कईसे
मोला वो बतावय
भुला जाही का रे
भुला जाही का रे
भुला जाही का...
मन के मिलईया ल
अपन कन्हईया ल
भुला जाही का....
लिखईया-डी पी लहरे
सर्वाधिकार सुरक्षित
Dplahre86@gmail.com
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