आरज़ू
••आरज़ू ••
न कसमों में न वादों में
रोज आते हो ख़्वाबों में ।।
प्रेम को बंदिशों में न बाँध
तुम बसे हो मेरी निगाहों में ।।
एहसास मेरे दिल की तुम
रख ले मुझे तेरी पनाहों में ।।
ख्वाहिश तुम अरमान मेरी
कुछ कह दो तुम इशारों में ।।
यूँ न चूप रहा कर जानेमन
क्या रक्खा है किनारों मे।।
पास आओ और मुस्कुराओ
तुम ही तुम हो इन नजारों में ।।
नजदीकी बढ़ा कर न भूल
तेरे आने से है रंगत बहारों में।।
दिल पुकारता है हर घड़ी
तु एक है लाख हजारों में ।।
रूठे ही रहोगे की मानेगे भी
प्रेम इत्र छिड़का है फ़िजाओं में ।।
मुझसे ख़फा न हो इस कदर
आ ले चलूँ तुझे चाँद सितारों में ।।
ख़ुद निसार गुमशुदा हूँ तुझमे
प्रेम तो टिकी है भावनाओं में ।।
मरते हैं आरजू न मार दोनों की
तेरी ख़ैरियत मेरी कामनाओं में ।।
शब्द रचना डी पी लहरे
सर्वाधिकार सुरक्षित
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