हिन्दुस्तानी
हिन्दुस्तानी लिखूँ
इस दुनिया में दो ही जाति है
एक पुरूष और एक नारी जाति है
सबके दिलों में ये कहानी लिखूँ
मैं खुद को हिन्दुस्तानी लिखूँ। ।
पुरूष और नारी मिलकर
मानव जाति कहलाता है
सब पुरुष का जवानी लिखूँ
मैं खुद को हिन्दुस्तानी लिखूँ। ।
नारी तो नारायणी है माता बहनें
अनेक रिश्तों की ये पालनहारी हैं
हर नारी को मैं मर्दानी लिखूँ
मैं खुद को हिन्दुस्तानी लिखूँ। ।
क्षमा,प्रेम,दया,करूणा सब में रहे
देश में मेरे भाई चारा ही बहे
दुखी के लिए आँखों में पानी लिखूँ
मैं खुद को हिन्दुस्तानी लिखूँ ।।
सत्य,अहिंसा,और परोपकार ।
मान-मर्यादा और संस्कार ।।
और जिगर में रवानी लिखूँ
मैं खुद को हिन्दुस्तानी लिखूँ। ।
निर्दयता निंदा अत्याचार ।
प्रेम गढ़े हिन्द संस्कार।।
और जहन में ये कुर्बानी लिखूँ
मैं खुद को हिन्दुस्तानी लिखूँ
लड़ें नहीं आपस मे,न मजहब खाई।
भाई भाई स्नेह में है सबका भलाई
उन वीरों का बलिदानी लिखूँ
मैं खुद को हिन्दुस्तानी लिखूँ। ।
ऊँच-नीच का खेल छोड़ो
जात-पात से नाता तोडो
छोटा-बड़ा भेद को विरानी लिखूँ
मैं खुद को हिन्दुस्तानी लिखूँ। ।
भारत माँ के सभी लाल हैं
दुश्मन देश के लिए महाकाल हैं
एक हैं एकता की निशानी लिखूँ
मैं खुद को हिन्दुस्तानी लिखूँ। ।
रचनाकार डी पी (हिन्दुस्तानी)
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