भारतवासी
••भारतवासी••
जम्मो झन भारत वासी आवन
बैरी बर गर के फ़ाँसी आवन।।
चल दया मया सब मन म बसावन
दिन दुःखी ल हिरदे ले लगावन।।
जाति-पाति ल सब मार भगावन
भाई बँधु कोनों ल नई सतावन।।
कोईली अस मीठ गोठ गोठियावन
भाई चारा के सब पाठ पढ़ावन।।
सुख-दुःख म सब संग निभावन
दुःख पीरा सब के पहिचानन।।
हँसत कुलकत जिनगी पहावन
देश के माटी ल माथ लगावन।।
मानुष चोला के हँसी नई उड़ावन
गरभ गुमान म हम नई इतरावन।।
चल जूर मिल के उच्छाह मनावन
चलव परेम के सब गीत गावन।।
चल सोन चिरईया के मान बढ़ावन
मोर भारत माता के पाँव पखारन।
भारत माँ के सब लाल कहावन
ये भूईयाँ के सब लाज बचावन।।
लिखईया-डी.पी.लहरे(भारतवासी)
कबीरधाम
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