नारी तैं कहाये ओ
**नारी तैं कहाये **
महिलाओं को समर्पित मेरी रचना
मईके ससुरे ल उज्जर करईया
फूलवारी तैं कहाये ओ
दुख हरईया सुख देवईया देवी
अवतारी तैं कहाये ओ। ।
मान बढ़ावत अंतस जुड़ावत
राज दुलारी तैं कहाये ओ
जग ल चलावत नता निभावत
सुवारी तैं कहाये ओ। ।
भाग जगावत मया बगरावत
महतारी तैं कहाये ओ
मन के मिलईया धीरज धरईया
नारी तैं कहाये ओ। ।
बुता करईया अन उपजईया
अन्न कुंवारी तैं कहाये ओ
दुख पीरा चिन्हईया आँसु पोछईया
बैरी बर आरी तैं कहाये ओ। ।
लोटाभर पानी देवईया भुख हरईया
पनिहारी तैं कहाये ओ
जीयत मरत के संग देवईया
संगवारी तैं कहाये ओ। ।
तोर बिना अबिरथा हे जिनगी
मया के चिन्हारी तैं कहाये ओ
पालन करईया पार लगईया नांगर
तुतारी तैं कहाये ओ।।
गुरतुर बोली म मन हरसईया
मोटियारी तैं कहाये ओ
दीदी बहनी मामी काकी फूफू भउजी
मोसी ममा दाई बुढी दाई
सारी तैं कहाये ओ। ।
बंदत हौं तोर चरन कमल ल
पालनहारी तैं कहाये ओ
सब ला अबला कहिबो कब ला
अन्नियाव बर चिन्गारी तैं कहाये ओ।।
शब्द रचना--डी पी लहरे
सर्वाधिकार सुरक्षित
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