का हे तोर मन म...
का हे तोर मन म.....
का हे तोर मन म तँय बता न गोरी ओ
सिरतोन मया ल झन लुका न गोरी ओ
मुंधरहा सपना म आके मेछराथस
हँस-हँस के सँगी अब्बड़ गोठियाथस
अब मोला जादा झन सता न गोरी ओ
तोर दिल म मोला तँय बसा न गोरी ओ
लुका लुका के मोला तँय दुरिहा ले झाँके
मगन होगे मोरो मन तोर मया ल पाके
देखत रतेंव तोला तीर म आना गोरी ओ
मोर तीर ल कहूँ तँय झन जाना गोरी ओ
रोज दिन आँखी म तँय ह झूलत रहिथस
मोर तीर मयारू तँय ह घूमत रहिथस
दुरिहा ल देख के झन तरसा न गोरी ओ
अब मया के मधुरस बरसा न गोरी ओ
सुन ले न संगी अब तँय मोर करलाई
चल न अब जल्दी गवन पठवनी कराई
तँय मोर से जादा झन लजा न गोरी ओ
चंदा अईसन चेहरा ल देखा न गोरी ओ
रचनाकार डी पी लहरे
सर्वाधिकार सुरक्षित dplahre86@gmail.com
Comments