भाग्य के भरोसे

**भाग्य के भरोसे**

मुकद्दर में जो लिखोगे वही होता है
नसीब को दोष दे बंदे तु क्यो रोता है

कर्म कर नेक कर्म ही पूजा होता है
कुछ न कर के क्यू चैन से सोता है

कद्र करो वक्त का ये ही गुरू होता है
काम से ही कामयाबी शुरू होता है

मन का मैल क्यों तु नहीं धोता है
उठ बढ आगे दिखावा एक धोखा है

देख, सीख कैसे किसान बीज बोता है
मेहनत से ही सारा उपज होता है

छोड आलस उदासी मन से हार होता है
मन से हारने वालों का तन बीमार होता है

निठल्ला का कहाँ ठिकाना होता है
मेहनती का बाजूओं में जमाना होता है

भाग्य के भरोसे सब कुछ ओ खोता है
कहता है वही होता है जो मंजूरे खुदा होता है

**रचनाकार डी पी लहरे **
सर्वाधिकार सुरक्षित

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