जीवन

जीवन

कभी सुख तो कभी दुख
कभी छाँव तो कभी धूप
जीवन की यही कहानी है।।

कभी रोग तो कभी भोग
कभी शांत तो कभी नोक झोंक
जीवन की रीत पुरानी है।।

कभी काया तो कभी माया
कभी खोया तो कभी पाया
जीवन की यही निशानी है।।

कभी दिया तो कभी लिया
कभी बालम तो कभी प्रिया
जीवन ये कितनी सुहानी है।।

कभी जागा तो कभी सोया
कभी हँसा तो कभी रोया
जीवन की राह विरानी है ।।

कभी धर्म तो कभी कर्म
कभी नर्म तो कभी गर्म
जीवन की खेल निराली है।।

कभी तन्हा तो कभी महफिल
कभी आसान तो कभी मुश्किल
जीवन की भार उठानी है।।

कभी फूल तो कभी धूल
कभी उसूल तो कभी फिजूल
जीवन की ये मनमानी है।।

कभी हार तो कभी जीत
कभी नफ़रत तो कभी प्रीत
जीवन तो बहता पानी है।।

कभी शिक्षा तो कभी दीक्षा
कभी दान तो कभी भिक्षा
जीवन फिर भी मस्तानी है।।

रचनाकार डी पी लहरे
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