दुलौरिन बेटी

दुलौरिन बेटी

दुलौरिन बेटी के मया अउ दुलार
अवतरथे बेटी तबले बोहाथे
अमरीत के धार।।1।।

श्री,लछमी,रमा,कमला नाव हे अपार
किलकारी म गुंजत रथे अंगना घर दुवार।।2।।

जेन घर बेटी अवतरे उॅहा खुशी के फुहार
महकाथे बेटी अंगना ल सब ल देथे पियार।।3।।

मयारूक होथे बेटी हर खुश होथे परवार
सुधार देथे बेटी हर मईके अउ ससुरार।।4।।

राखी,भाईदूज,तीजा पोरा के लेनहार
बेटी बिना बिरथा हे ये जम्मो तिहार।।5।।

जब सुनथे बेटी हर ददा ल बीमार
दउडत भागत चले आथे करथे गोहार।।6।।

काली,दुरगा,सरसती,चण्डी के अवतार
बेटी से होथे घर के बढ़ती अउ बिस्तार।।7।।

दुशमन बर बेटी घलो हर धर लेथे
तलवार
बेटी घलो ह देथे सीख अउ संसकार।।8।।

मान बढ़ाथे बेटी पढ के खुश होथे रिशतेदार
बेटी बेटा म भेद नई हे येही बात हे सार।।9।।

रचनाकार-डी पी लहरे कबीरधाम छत्तीसगढ़

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