प्रेम रंग
प्रेम रंग (होली)
आ मल दूँ गुलाल तुम्हारे गोरे गालो में
प्रेम रंग नैनों में झूले धोने के बाद खयालों में ।।
रंग गुलाबी डालूं तोहे गोरी बदन रंगीली
नशा भाँग सा प्रेम रंग चढ जाये छैल छबीली ।।
नीला पीला लाल गुलाबी रंगों में सराबोर करूँ
तुम्हे सजाऊँ दुल्हन की तरह प्रेम रंग पुरज़ोर भरूँ ।।
उड़ने लगी गुलाल दिल में आ मेरे हमजोली
प्रेम रंग में डूब डूब कर खेलें आज हम होली।।
गीले शिकवे आज भूलकर बोलें प्रेम की बोली
प्रेम रंग में रंग दूँ गोरी तेरी दामन चोली।।
भर भर मारूं मैं पिचकारी गोरी छुप न जाना
मैं कान्हा तुम राधा मेरी मुझसे क्या शरमाना। ।
रचनाकार डी पी लहरे
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