दूरियाँ
दूरियाँ
तेरी याद मुझे सता रही है क्या करूँ
आग सिने में लगा रही है क्या करूँ। ।
ये बहारों का मौसम भी है उजड़ा उजड़ा
जब तक न देखूँ तेरी चाँद सा ये मुखड़ा। ।
दिल में अपनी जोर नहीं है क्या करूँ
तुम ही तुम कुछ और नहीं है क्या करूँ। ।
ऑखों को ठंडक पहुंचाने आ जाना
दिल की इक प्यास बुझाने आ जाना। ।
तन्हाई में दिन कटते नहीं क्या करूँ
दिल रोते कभी हँसते नहीं क्या करूँ। ।
न दूरियाँ बढा न बेकरार कर दिलरुबा
आ पास आ हमसे प्यार कर महबूबा। ।
तुम बिन एक पल चैन नहीं है क्या करूँ
तुम बिन दिन और रैन नहीं है क्या करूँ। ।
खुशियों का खजाना लेकर आ जाना
प्रेम का नजराना लेकर आ जाना ।।
दिल तुम बिन लगता नहीं क्या करूँ
तन्हा अच्छा लगता नहीं क्या करूँ
रचनाकार--डी पी लहरे
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